JKHM =जनता क्यों है मौन ❓❓❓
मुझे तो कोई फर्क नहीं पड़ता पड़ोस में आग लगी है या दुर्घटना घटी है मैं नहीं जानता हूँ कि वो कौन है ❓
उनके साथ अन्याय हो रहा है या हुआ है मुझे क्या मेरे साथ नहीं हुआ है मैं बीच बचाव में क्यों जाऊं क्यों अपना समय बर्बाद करूँ❓
मुझे नहीं पड़ना किसी के चक्कर में मेरा काम हो रहा है मुझे क्या मैं क्यों लड़ता रहूँ सिस्टम से❓
कुछ ऐसे ही विचार हमको गुलामी की ओर ले जाते हैं
और हम अपने आप को संभाल नहीं पाते हैं ।
जब अपनेे आप पर बीत जाती है तो सिस्टम को दोष देते हैं कहते हैं सरकार ये नहीं करती वो नहीं करती लोग ऐसे हैं वैसे हैं ।
आखिर कौन है सरकार ❓
वास्तव में आप और हम हैं सरकार
हम ही चुनते हैं सरकार और हम ही हो जाते हैं लाचार ।
क्योंकि हम अपनी ताकत भूल चुके हैं , गुलामी की आदत हो गई है , चाटूकारिता करते हुए हम भूल जाते हैं सही क्या है और गलत क्या है यह नहीं जानते कि हम पतन की ओर जा रहे हैं।
हम भूल जाते हैं कि मनुष्य एक सामाजिक प्राणी है पाॅंच तत्वों से मिलकर बना है यह शरीर
भू , गगन , वायु , अग्नी , नीर
भ +ग+ वा+ न
उसे अपने जीवन में इन पांच तत्व का ज्ञान होना अत्यंत आवश्यक है
इसके अतिरिक्त उसे समाज में लोगों की आवश्यकता होती है।
आज के समय में लोग इतने व्यस्त हो गये हैं कि या स्वार्थ सिद्ध करने में लगे हैं उन्हें सही को सही और गलत को गलत कहने की फुर्सत नहीं है , धिक्कार है ऐसे लोगों पर।
नेता जी सुभाषचंद्र बोस ने कहा था :
"सबसे बड़ा अपराध है अन्याय सहना और गलत के साथ समझौता करना।"
आज लोग डरते हैं गलत के खिलाफ आवाज़ उठानें को
यदि कोई आवाज अन्याय के विरोध में ऊठती भी है ,या तो उसको दबा दिया जाता है या उसका राजनीतिकरण कर मुद्दों से जनता को भटकाया जाता है।
हम किस तरफ जा रहे हैं ❓
हमें बेहतर कल के लिए आज सुधार करना जरूरी है।
अपना पराया का भेद भूलकर आगे आना चाहिए और अपने देश की उन्नति और ख़ुशहाली के लिए गलत को गलत और सही को सही कहने की हिम्मत करनी चाहिए।
भगवान ने मनुष्य योनि को सब योनियों में श्रेष्ठ बनाया है।
इंसान हो इंसानियत का काम करो।
जिओ और जीने दो।
जय जवान, जय किसान ।
जय विज्ञान, जय हिन्दुस्तान।।
🙏💐🙏
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